बोलती
नहीं ,
पर
सब बतलाती हैं ,
नम
आँखें सब कह जाती हैं ।
पता
नहीं है नम का,
चीर
जिगर को नहीं सकते ,
दिल
दर्द से मचलता है,
आँखों
में यह झलकता है ,
आईना
है, सब दिखलाता है,
ये
नम आँखे , ये नम आँखे !
न तेरी,
न मेरी
ये
दासता है पूरे ब्रहमांड की
नम
आँखों की , नम आँखों की !!
कु० जोमियर
जीनी
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