Thursday, March 1, 2012

कितने पाकिस्तान-एक ऐतिहासिक दस्तावेज़






अभी थोड़े दिन पहले कितने पाकिस्तान उपन्यास पढ़ा । महान कथाकार कमलेश्वर द्वारा लिखित यह बहुत ही अहम,ऐतिहासिक और कालजयी रचना है । सन्‌ २००३ में इसे साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाज़ा गया । इसे पढ़ते हुए भारत का संपूर्ण इतिहास मानस पटल पर चलचित्र की भाँति नाचने लगता है । यह उपन्यास दुनिया भर की आत्माओं से किया गया जिरह है जो लेखक के अंतर्द्वंद्व से निकला है । कमलेश्वर इसे सन्‌ १९९० में लिखना प्रारंभ किए थे | उपन्यास लिखने के लिए लेखक ने विधिवत छुट्टी लेकर देहरादून गये और संपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज़ के साथ लिखना प्रारंभ किए । यह उपन्यास मानवता के दरवाज़े पर समय और इतिहास की दस्तक है । समय की अदालत में एक-एक कर दुनिया की सभी आत्माओं को समय द्वारा एक-एक कर बुलाया जाता है जो इतिहास की नदी को बहते, उसमें पात्रों को और घटनाओं को डूबते उतराते हुए देखता है - कानपुर का रेलवे स्टेशन, श्री राम द्वारा शम्बूक का वध, अहिल्या का बलात्कार,  मेसोपोटामिया का सम्राट गिलगमेश, आर्यों का भारत पर आक्रमण , कश्मीर, बोस्निया, बाबरी मस्जिद, जिन्ना, मौंटबेटन, अफगानिस्तान, औरंगजेब, टीपू, महाभारत, हिटलर, दारा शिकोह ,और न जाने कितनी आत्माओं पेश किया जाता है । कितने पाकिस्तान दुनिया के ऐसे तमाम देशों का प्रतीक है जिनका निर्माण किसी त्रासदी के परिणामस्वरूप होता है । साथ ही दुनिया से यह आशा की जाती है कि एक के बाद एक कितने पाकिस्तान बनने यह परंपरा बंद होगी ....।

1 comment:

  1. अजीब इत्तेफाक है की आप का भी नाम दीपक और मेरा भी, आप भी गाजीपुर से और मै भी. आपको बी कितने पाकिस्तान अच्छी लगी और मुझे भी. मेरे पास तो कितने पाकिस्तान की तारीफ के लिए शब्द नहीं हैं. पढ़ते समय ऐसा लगता है जैसे पढ़ नहीं रहे है सब कुछ आँखों के सामने चल चित्र की तरह आता जा रहा है. जैसे जब डरा शिकोह और गाँधी जी की गवाही होती है तो कमलेश्वर का उस समय के माहौल का वर्णन जैसे हवावों में खुश्बू और शकुन का एहसास होने लगा. मै पढ़ते समय इसका हिस्सा हो जाता हू. ये मुझे हर बार पहले से ज्यादा अच्छी लगती है. मेरे पास शब्द नहीं है इसकी तारीफ के लिए.

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