महँगाई
और भ्रष्टाचार
देखो
आई-आई-आई,
महँगाई
आई ।
जाने कौन
से देश से आई,
है ये
महँगाई ।
अमीरों
को गरीब बना दे,
गरीबों
को फ़कीर ।
सबकी
गरीबी का स्वागत करने आई,
देखो यह
महँगाई ।
सब्ज़ी,
फल, दूध के दाम बढ़ाने आई,
बच्चों
की लालसा पर अपना हक जताने आई ।
बड़ों के
काम के पैसों पर अपनी नज़र गड़ाने आई ,
देखो यह
महँगाई ।
अपने साथ
अपने भाई को भी है लाई,
बड़े से
बड़ा, छोटे से छोटे नेता की पोल खोलने आई ,
देखो यह
महँगाई ।
अब आई
भ्रष्टाचार की बारी ,
अपनी बहन
को विदा कर, अपनी राजगद्दी बनाने आया ।
यह तो
अपने भाई को भी पीछे छोड़ आया ।
देखो यह
महँगाई का भाया ।
इसने भी
है भारी धूम मचाई, बहुतों के राज खोलने आया ।
भारत
महान के नारे को झूठा बताने आया ।
देखो यह
महँगाई का भाया ।
मेरा
संदेश है सिर्फ़ इतना,
भ्रष्ट
मत बनना, महँगाई से बचना आकांक्षा पारिजात
कक्षा- नवीं
के.वि.नं.२,दिल्ली छावनी
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