Saturday, May 9, 2015

महँगाई और भ्रष्टाचार



महँगाई और भ्रष्टाचार
देखो आई-आई-आई,
महँगाई आई ।
जाने कौन से देश से आई,
है ये महँगाई ।
अमीरों को गरीब बना दे,
गरीबों को फ़कीर ।
सबकी गरीबी का स्वागत करने आई,
देखो यह महँगाई ।
सब्ज़ी, फल, दूध के दाम बढ़ाने आई,
बच्चों की लालसा पर अपना हक जताने आई ।
बड़ों के काम के पैसों पर अपनी नज़र गड़ाने आई ,
देखो यह महँगाई ।
अपने साथ अपने भाई को भी है लाई,
बड़े से बड़ा, छोटे से छोटे नेता की पोल खोलने आई ,
देखो यह महँगाई ।
अब आई भ्रष्टाचार की बारी ,
अपनी बहन को विदा कर, अपनी राजगद्दी बनाने आया ।
यह तो अपने भाई को भी पीछे छोड़ आया ।
देखो यह महँगाई का भाया ।
इसने भी है भारी धूम मचाई, बहुतों के राज खोलने आया ।
भारत महान के नारे को झूठा बताने आया ।
देखो यह महँगाई का भाया ।
मेरा संदेश है सिर्फ़ इतना,
                                                       भ्रष्ट मत बनना, महँगाई से बचना 

आकांक्षा पारिजात 
कक्षा- नवीं
के.वि.नं.२,दिल्ली छावनी

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