सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ..!
हर वर्ष गणतंत्र दिवस बडई धूमधाम से मनाया जाता है । एक संकल्प भी किया जाता है । तिरंगे फहराए जाते हैं । देशभक्ति के गीत गाएँ जाते हैं । टी.वी. पर भी देशभक्ति फ़ोल्मों की बाढ़ सी आ जाती है । पर अगली सुबह होते ही फिर वही पुरानी लीक पकड़ ली जाती है । वर्ष दर वर्ष भ्रष्टाचार, गरीबी, बेरोजगारी, बालमज़दूरी , अत्याचार , अनाचार बढ़ता जाता है । राजनैतिक पार्टियों को अपने खोखले दावों से फ़ुर्सत ही नहीं मिलती । न जाने कब सही गणतंत्र का अर्थ साकार होगा....जन के मन क्या कहना, सब अपने मन की गाते हैं ।
जीवन का कुछ भी लक्ष्य नहीं, बस जगते हैं सो जाते हैं ।
देश के ठेकेदारों की, वतन परस्ती ना पूछो,
सबके हित की गाते हैं, और सबके हित की खाते हैं ।
जीभ न थकती नारे देकर, अमन चैन खुशहाली के ,
नत्था मरता रोज यहाँ, बच्चे भूखे सो जाते हैं ।
धर्म, सभ्यता, नैतिकता की देते लोग दुहाई हैं ,
बलात्कार होता देवी का , दानव पूजे जाते हैं ।
भ्रष्टाचार घोटालों से , देश जल उठा है यारों,
देश की उठती लपटों में , वो सेक के रोटी खाते हैं ।
सारे जहाँ से अच्छा है , हिन्दुस्तां हमारा ,
हर वर्ष राष्ट्र त्योहारों पर , गीत यही दुहराते हैं ।
रश्म अदयगी गीतों की , बस यूँ ही चलती जाएगी,
देश का खाकर देश को लूटो, मंत्र यही अपनाते हैं ।
शिक्षा नीति बनाते मंत्री, देश को शिक्षित करने की,
बच्चे जूठे बर्तन धोते , कागज़ पर पढ़ने जाते हैं ॥
दीपक कुमार

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