Wednesday, January 25, 2012

गणतंत्र दिवस

सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ..!
हर वर्ष गणतंत्र दिवस बडई धूमधाम से मनाया जाता है । एक संकल्प भी किया जाता है । तिरंगे फहराए जाते हैं । देशभक्ति के गीत गाएँ जाते हैं । टी.वी. पर भी देशभक्ति फ़ोल्मों की बाढ़ सी आ जाती है । पर अगली सुबह होते ही फिर वही पुरानी लीक पकड़ ली जाती है । वर्ष दर वर्ष भ्रष्टाचार, गरीबी, बेरोजगारी, बालमज़दूरी , अत्याचार , अनाचार बढ़ता जाता है । राजनैतिक पार्टियों को अपने खोखले दावों से फ़ुर्सत ही नहीं मिलती । न जाने कब सही गणतंत्र का अर्थ साकार होगा....

जन के मन क्या कहना,  सब अपने    मन की   गाते हैं ।
जीवन का कुछ भी लक्ष्य नहीं, बस जगते हैं सो जाते हैं ।
 देश       के     ठेकेदारों     की,  वतन   परस्ती  ना पूछो,
सबके हित   की    गाते हैं,   और सबके हित की खाते हैं ।
जीभ    न    थकती  नारे देकर,  अमन चैन खुशहाली के ,
नत्था   मरता   रोज    यहाँ,   बच्चे   भूखे   सो जाते हैं ।
धर्म,    सभ्यता,   नैतिकता  की    देते   लोग   दुहाई हैं ,
बलात्कार   होता  देवी    का ,  दानव    पूजे    जाते हैं ।
भ्रष्टाचार   घोटालों   से ,    देश   जल   उठा   है    यारों,
देश की उठती लपटों   में ,   वो   सेक  के रोटी खाते हैं ।
सारे    जहाँ    से    अच्छा    है  ,   हिन्दुस्तां    हमारा ,
हर वर्ष राष्ट्र   त्योहारों   पर  ,   गीत   यही   दुहराते  हैं ।
रश्म अदयगी गीतों  की ,  बस  यूँ  ही   चलती   जाएगी,
देश का खाकर देश को   लूटो,   मंत्र  यही   अपनाते हैं ।
शिक्षा नीति बनाते मंत्री, देश   को   शिक्षित   करने की,
बच्चे जूठे   बर्तन   धोते  ,   कागज़   पर पढ़ने जाते हैं ॥

                                                         दीपक कुमार









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