Monday, April 23, 2012

अद्भुत बच्चे

जा रहा था रास्ते से ।
देखा मैंने आँखों से ।
पर विश्वास नहीं हुआ ,
यह सच है या हूँ मैं सपने में ।
सपना इतना बुरा न होगा ।
इनका भी कोई अपना होगा ।
पर इन्हें क्यों ऐसा छोड़ा ।
किसने इनका सपना तोड़ा ।
दिल टूटे ,आती बात समझ में ।
पर सपने टूटे बचपन में ?
कर रहे काम रो-रो कर ,
तब भी खाते मार,
सब गम चुप करके सह जाते ।
किसके हैं यह अद्भुत बच्चे ?

                                     अमित देब ( नवीं ’द’)
                                  केन्द्रीय विद्यालय क्र.१,ईटानगर

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